Maa
to my Aai and Mom,
ये माँ , तू बोला करती थी
थोड़ा पढ़ ले , समझ ले ये दुनियादारी
लड़की बनके विरासत में लायी हैं तू जिम्मेदारी
जिम्मेदारी ना छुड़ा पायेगी और दुनियादारी ना सीख़ पायेगी
ना समझी कभी गहराई इस बात की ,
जब तक आँचल में तेरे खेला करती थी
एक दिन अचनाक एक तूफ़ान आया,
सब ख़ुशनमा तेरा आशियाँ तबहा कर गया
और तेरा आंचल भी मुझे छोड़ गया
तबाही देख क्यों कहाँ से आ गए बोहोत सरे लोग
सब का था एक ही नारा
एक साल में मेरी शादी करना
हो गई शादी बिना किसी रीवाज़ से
कुछ समझा नहीं क्या हो रहा हैं
बस नए घर के सरे देख रहे थे आशाओं से
क्या आता हैं या नहीं आता , ना ये कुछ पुछा गया
ये करो और दिखाओ अपने संस्कार सिर्फ ये बोला गया
चुप रही, सहती रही , "हा हा " बोलती रही, न किया कोई इन्कार
दिन बीते , महीने और बीते साल
करती रही सारी चीज़े की कोई न उठाये आपके संस्कार पे सवाल
एक दिन अपने लिए जीने का आया खयाल
बोली अपने दिल की बात की समझो हमें भी इंसान
उठे सिर्फ सवाल और ना पूछा गया कोई ज़वाब
लड़की हो जिम्मेदारी निभाओ ना सिखाओ हमें अपना काम
लड़की हो बहू हो मर्यादा में रहो
कोई दिल की बात जुबां पे मत लाओ
सच माँ याद आयी तेरी और तेरे सीख की
लड़की बनके विरासत में लायी हैं तू जिम्मेदारी
आँचल नहीं अब तेरा जहां में छुप सकू
इस खोकली दुनियादारी को झेल सकू
सोचा तेरी आँचल में रो लू जी भर
पर आंसू पोछे और खड़ी हुयी तेरी साहसी बच्ची बन कर
तूने सिखाया , लड़की होना दोष नहीं मेरा
फिर तू जाते ही दोषी कैसे हो गयी मैं माँ ???
बेटी ही तेरी खुष थी मैं
बीवी बहु बनते ही जीना भूल गयी मैं
कभी लगता हैं ये वक़्त को मोड़ लू
और पहले वाली जिंदगी दोबारा जी लू
तेरी याद में रोना सीखा अब इसके साथ जीना भी सीख़ रही हू मैं माँ :)
ये माँ , तू बोला करती थी
थोड़ा पढ़ ले , समझ ले ये दुनियादारी
लड़की बनके विरासत में लायी हैं तू जिम्मेदारी
जिम्मेदारी ना छुड़ा पायेगी और दुनियादारी ना सीख़ पायेगी
ना समझी कभी गहराई इस बात की ,
जब तक आँचल में तेरे खेला करती थी
एक दिन अचनाक एक तूफ़ान आया,
सब ख़ुशनमा तेरा आशियाँ तबहा कर गया
और तेरा आंचल भी मुझे छोड़ गया
तबाही देख क्यों कहाँ से आ गए बोहोत सरे लोग
सब का था एक ही नारा
एक साल में मेरी शादी करना
हो गई शादी बिना किसी रीवाज़ से
कुछ समझा नहीं क्या हो रहा हैं
बस नए घर के सरे देख रहे थे आशाओं से
क्या आता हैं या नहीं आता , ना ये कुछ पुछा गया
ये करो और दिखाओ अपने संस्कार सिर्फ ये बोला गया
चुप रही, सहती रही , "हा हा " बोलती रही, न किया कोई इन्कार
दिन बीते , महीने और बीते साल
करती रही सारी चीज़े की कोई न उठाये आपके संस्कार पे सवाल
एक दिन अपने लिए जीने का आया खयाल
बोली अपने दिल की बात की समझो हमें भी इंसान
उठे सिर्फ सवाल और ना पूछा गया कोई ज़वाब
लड़की हो जिम्मेदारी निभाओ ना सिखाओ हमें अपना काम
लड़की हो बहू हो मर्यादा में रहो
कोई दिल की बात जुबां पे मत लाओ
सच माँ याद आयी तेरी और तेरे सीख की
लड़की बनके विरासत में लायी हैं तू जिम्मेदारी
आँचल नहीं अब तेरा जहां में छुप सकू
इस खोकली दुनियादारी को झेल सकू
सोचा तेरी आँचल में रो लू जी भर
पर आंसू पोछे और खड़ी हुयी तेरी साहसी बच्ची बन कर
तूने सिखाया , लड़की होना दोष नहीं मेरा
फिर तू जाते ही दोषी कैसे हो गयी मैं माँ ???
बेटी ही तेरी खुष थी मैं
बीवी बहु बनते ही जीना भूल गयी मैं
कभी लगता हैं ये वक़्त को मोड़ लू
और पहले वाली जिंदगी दोबारा जी लू
तेरी याद में रोना सीखा अब इसके साथ जीना भी सीख़ रही हू मैं माँ :)
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